गौरेला पेंड्रा मरवाही: क्लिनिक’ बना ‘अस्पताल’! नियमों की धज्जियां, BMO पर सवाल—जिला चिकित्सा अधिकारी ने कहा होगी जांच,, देखे वीडियो!
जिला चिकित्सा अधिकारी (CMHO) डॉ. रामेश्वर शर्मा ने बयान जारी कर कहा है कि पूरे प्रकरण को संज्ञान में लिया गया

कलेक्ट्रेट के पास अवैध क्लिनिक का बड़ा खुलासा: BMO पर गंभीर आरोप, बिना अनुमति भर्ती मरीज, अवैध लैब और दवाओं का खेल — CMHO ने दिए जांच के आदेश
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक बड़ा और गंभीर मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला मुख्यालय में कलेक्ट्रेट कार्यालय के पास संचालित एक निजी क्लिनिक पर नियमों की अनदेखी करते हुए अस्पताल जैसी सुविधाएं संचालित करने के आरोप लगे हैं। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप की स्थिति बन गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उक्त क्लिनिक को केवल ओपीडी (OPD) संचालन की अनुमति होने के बावजूद वहां मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। यह सीधे तौर पर नर्सिंग होम एक्ट का उल्लंघन माना जा रहा है। इतना ही नहीं, क्लिनिक परिसर में बिना किसी अधिकृत विशेषज्ञ के पैथोलॉजी लैब का संचालन भी किया जा रहा है, जो नियमों के विरुद्ध है।
इसके अलावा बिना वैध पंजीयन के दवाइयों का स्टॉक रखकर कथित रूप से मुनाफाखोरी किए जाने के भी आरोप सामने आए हैं। इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपों के केंद्र में ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी (BMO) डॉ. सतीश कुमार अर्गल का नाम आ रहा है, जो स्वयं एक जिम्मेदार प्रशासनिक पद पर पदस्थ हैं।

आरोप है कि डॉ. अर्गल अपने शासकीय दायित्वों की अनदेखी कर निजी चिकित्सा व्यवसाय में संलिप्त हैं, जिससे ‘हितों के टकराव’ (Conflict of Interest) की स्थिति उत्पन्न हो रही है। वहीं, उनकी पत्नी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, जो एक त्रिवर्षीय चिकित्सा पाठ्यक्रम की डिग्रीधारी हैं और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र साधवानी में पदस्थ बताई जा रही हैं।
जिला प्रशासन के नजदीक इस प्रकार की गतिविधियों का संचालन होना भी कई सवाल खड़े करता है। स्थानीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला चिकित्सा अधिकारी (CMHO) डॉ. रामेश्वर शर्मा ने बयान जारी कर कहा है कि पूरे प्रकरण को संज्ञान में लिया गया है और इसकी विस्तृत जांच कराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल, इस पूरे मामले ने जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है। अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और प्रशासन इस पर कितना सख्त कदम उठाता है।









